शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

नीति के दोहे (मुक्तक)

कवि :अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर 

अशर्फी लाल मिश्र 
उधार  देना 
धन उधार सदा उसको ,दिखता हो गुणवान। 
अवगुणी करै न वापस ,धनहि पाइ धनवान।।

वारिधि  देय उधार जल ,देख मेघ गुणवान। 
घन बरसे वारि वापस ,सिंधु सदा धनवान।।

©Poet : Asharfi Lal Mishra, Akbarpur, Kanpur. 


शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

नीति के दोहे (मुक्तक)

© कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर। 

अशर्फी लाल मिश्र 
कर्ज 

पैसे  दिये  उधार हों , मांगो बिन संकोच। 
डूब जाये  सारा धन ,यदि होगा संकोच।।

शर्म 

व्यापार होय या  काम ,शर्म  पास  नहि  होय। 
उसकी  सदैव  तरक्की , यह जानत सब कोय।।

Poet: Asharfi Lal Mishra, Akbarpur, Kanpur.


शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

नीति के दोहे (मुक्तक)

 कवि : अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर। 

अशर्फी लाल मिश्र 
खुशबू 
फूल  खुशबू  साथ पवन , पवन बहे जिस ओर। 
प्रतिभा  खुशबू  खुद बहे, फैले     चारों   ओर।। 
सुख 
भविष्य चिन्ता छोड़ दे ,भूतहि  देय विसार। 
वर्तमान   संभाल    ले ,सुखी  होय  संसार।।
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© Poet : Asharfi Lal Mishra,Akbarpur, Kanpur.


बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

नीति के दोहे (मुक्तक)

© कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर 

अशर्फी लाल मिश्र 












मित्र 
परिछाईं   संकट   काल, धीरज   देता  होय। 

स्वार्थ रहित हो भावना ,मीत जानिये सोय।।

सुख

वशीभूत   न लालच के  ,निन्दा  से हो दूर। 
ताहि जीवन सदा सुखी ,खुशियों से भरपूर।।

रविवार, 11 अक्टूबर 2020

लोकतंत्र बढ़ रहा उधर

 © कवि : अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर,कानपुर । 

Asharfi Lal Mishra 

लोकतंत्र   बढ़   रहा  उधर ,
बाहुबली  धनबली जिधर। 
अपराधी गुंडे बढ़ रहे उधर ,
लोकतंत्र का गिरता स्तर।।

जन  प्रतिनिधि पथदर्शक ,
जनता    होती  अनुगामी। 
जैसे   होंगे  जन प्रतिनिधि ,
जनता    होगी   अनुगामी।।

हिमालय हो जाय चूर चूर,
सागर   में   उठें     हिलोरें। 
 अडिग   रहे  यह  लोकतंत्र ,
जनता    हो     अनुगामी।।

लोकतंत्र के दो स्तम्भ सदा  ,
सहमति असहमति साथ रहें।
अचानक    आये  कोई  संकट ,
मतभेद   भुलाकर  साथ  रहें।।
-- लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
=*= 








गुरुवार, 8 अक्टूबर 2020

देख शिवा का रण कौशल

 © कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर 

अशर्फी लाल मिश्र 

देख  शिवा  का  रण कौशल,
भयभीत सदा रहता आदिल। 
अफजल आदिल का सेनापति ,
सेना    रहती    साथ    सदा।।

अफजल जो भी चाल चले ,
शिवाजी  उससे दूनी चले। 
अफजल ने भेजा एक संदेश, 
हुई शिवा अफजल की भेंट।।

कपटी अफजल साथ कटार,
शिवा  के  पीठ करता  वार। 
मराठा सिंह का बघनख वार,
आंते    बाहर   हाथ    पसार।।
 
अब  भूमि  पड़ा  था   अफजल,
मचगई आदिल सेना में भगदड़।
देख   शिवा  का   रण     कौशल ,
भयभीत   सदा  रहता  आदिल।।
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रचनाकार एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर






शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

घाट घाट का पानी पिया (मुक्तक)

© कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर। 

अशर्फी लाल मिश्र 
अफ्रीकी  ट्रेन में धक्के खाये ,
फिर भी मोहन निराश नहीं। 
न्याय मंदिर में जज ने कहा,
सिर पर होगी पगड़ी नहीं।।

आंदोलन  "चम्पारण" का ,
या  फिर हो "भारत  छोडो"।
घाट   घाट  का  पानी पिया,
 गांधी का "दांडी मार्च" हुआ।। 

हाथ   में     जिनके    लाठी ,
कमर   में     धोती    आधी। 
 घाट    घाट  का पानी  पिया,
    तब कहलाये गांधी राष्ट्र पिता।।

©अशर्फी लाल मिश्र



 
 














भार्गव राम खण्डकाव्य - 47

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943---) मुनि सतानंद की अनुमति पाय, धीरे धीरे चल पड़ी जनक लली। अनुगामी हो गईं थ...