मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 3

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र (1943------)







रमणीक शिखर विंध्याचल का,

था खुला खजाना  प्रकृति का।

जानापाव  नाम   से  है  चर्चित,

जँह आश्रम स्थल जमदग्नि का।।


अद्य  वहाँ महू जिला इंदौर,

सोहे  आश्रम  जमदग्नि का।

प्रकृति  जहाँ खुली थिरकती,

 अरु उदगम स्थल चम्बल का।।


 हो ऊषा होंठों पर मुस्कान,

सदा  मयूर करते  हों नर्तन।

जँह साथ खेलें मृग वनराज,

अरु राम खेलें छौना वनराज।


प्रमुख सप्त  ऋषियों में,

वेदज्ञ  ऋषि थे जमदग्नि।

बालक राम की प्रतिभा से,

अभिभूत  ऋषि जमदग्नि।।


राम ने पाया वैदिक ज्ञान,

अपने पितु जमदग्नि से।

युद्ध-कला    शस्त्र-ज्ञान,

जमदग्नि चाहें  शिव  से।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर.©


शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य -2

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







 घुटुवन चलत गिरत परत,

राम आवत कुटिया बाहर।

जब ध्यान गया  माई   का,

दौड़  पड़ी   कुटिया  बाहर।।


बाहर खेल रहे रेणुका नंदन,

साथ था छौना वनराज का।

एक क्षण थी मातु अचंभित,

सचमुच  छौना वनराज का?


वनराज खेल  में गुर्राया,

फेंका सौ योजन राम ने।

अति  हर्षित मातु रेणुका,

जब वनराज फेंका राम ने ।।


इसी बीच आ गये थे दादा,

ऋषि ऋचीक  कुटिया पर।

कल से राम खेलेगा नित्य,

मेरे साथ  मेरी कुटिया पर।।


राम नित्य  सुबह  जायें,

खेलें  दादा  कुटिया पर।

खेल खेल बहु शिक्षा पाई,

निज दादा की कुटिया पर।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य -1

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







वैशाख मास का रम्य महीना,

था सतयुग त्रेता सन्धिकाल।

तिथि तृतीया शुक्ल पक्ष की,

रेणुका जन्मा अद्भुत लाल।।


जमदग्नि कुटिया हो गई जगमग,

जब कुटिया में प्रगटा पंचम लाल.

हर्षित  होकर  गदगद  ऋषि ने,

नाम  रख  दिया  उसका 'राम'।।


जब जाना ऋषियों मुनियों ने,

भीड़ जुटी  ऋषि आश्रम पर।

सब दर्शन  को थे  लालायित,

प्रथम  दर्शन हों शिशु राम के।।


देव  भी गये   वेश  बदलकर,

दर्शन हित जमदग्नि राम के।

मुख तेज देख सभी अचंभित,

जिसने भी दर्शन किये राम के।। 

 

बालक राम का तेज देखि,

जमदग्नि थे अब  चिंतित।

शस्त्र शास्त्र की शिक्षा कैसे,

गुरु  होंय स्वयं  शिव  जैसे।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

भार्गव राम खण्डकाव्य - 24

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943----) कार्तवीर्य था अति  बलशाली, भगवन दत्तात्रेय के वरदान से। हो गईं थीं दो ...