काव्य दर्पण
मंगलवार, 16 जून 2026
भार्गव राम खण्डकाव्य - 24
सोमवार, 15 जून 2026
भार्गव राम खण्डकाव्य - 23
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र (1943----) |
आये त्रिदेव अनुसुइया परीक्षा,
मातु बना दिये त्रिदेवहिं शिशु।
सभी शिशु थे भूख से व्याकुल,
मातु करावहि स्तनपान शिशु।
बड़ा हुआ जब बालक ,
दत्तात्रेय अत्रि बुलावहि,
मातु जिनकी अनुसुइया,
दत्ता दत्ता पूत बुलावहि ।।
थे तीन शीश अरु एक शरीर,
भगवन दत्तात्रेय नाम विख्यात।
छह भुजायें थीं शोभित जिनके,
पूत अत्रि अनुसुइया विख्यात।।
कार्तवीर्य अर्जुन था राजा,
पुरा महिष्मति नगरी का।
था दत्तात्रेय का अनन्य भक्त,
क्षत्रिय था हैहय वंश का।।
देख कठिन तपस्या कार्तवीर्य,
हो गये थे दत्तात्रेय अति प्रसन्न।
मांगो आज तुम मनोवांछित वर,
सुन कार्तवीर्य हुआ अति प्रसन्न।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
मंगलवार, 9 जून 2026
भार्गव राम खण्डकाव्य - 22
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र ( 1943----) |
बार बार कहहिं ऋषि जमदग्नि,
पूत माँग लो मनोवांछित वरदान।
भ्राता मेरे थे सदा संकट में रक्षक,
आज बिनु भ्राता जग सूना जान।।
पूत तुम्हारा अति सुन्दर वरदान,
तुम्हारा भाव निज भ्राता कल्यान।
तभी अचानक दिख गये भ्राता,
जमदग्नि ने दिया पहला वरदान।।
मन में राम अब क्या है इच्छा,
अब शीघ्र मांगो दूजा वरदान।
मातु बिना जग सूना लागहि,
अब कौन बुलाये मुझको लाल।।
तभी अचानक रेणुका जागी,
बार बार पुकार रही बेटा राम।
माता अरु सब भईया सम्मुख,
तब भी दिखे अति उदास राम।।
तीजा वरदान अब माँगहि राम,
विस्मृति हो जाये अप्रिय घटना।
था ऋषिवर हाथ सिर बेटा राम,
अब प्रफुल्लित थे जमदग्नि राम।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
सोमवार, 8 जून 2026
भार्गव राम खण्डकाव्य - 21
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) |
सब विधि मातु अनुकूल जान,
कह दिया आदेश पिता का।
शीश काट ले जाओ पूत तुम,
अर्पित सहर्ष पति चरणों में।।
थी पितु आज्ञा सिरोधार्य,
धरि मातु चरण निज शीश।
मन में शिव को नमन कर,
काट दिया प्रिय मातु शीश।।
एक हाथ में था परशु,
दूजे मातु रेणुका शीश।
राम पहुँचे पितु के पास,
कीन्ह चरणअर्पित शीश।।
गदगद हो गये ब्रह्मर्षि अब ,
जान राम पितु आज्ञाकारी।
पर राम का चेहरा था उदास,
थीं जग खुशियाँ माता पास।।
जमदग्नि थे अति हर्षित,
राम पुत्रों में आज्ञाकारी।
माँगो पूत मनोवांछित वर,
एक नहीं तीन तीन वर।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
भार्गव राम खण्डकाव्य - 20
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र (1943------) |
रहती संकट में मातु साथ,
कहो राम क्या संकट आज।
क्यों नीर भरे नयनों में आज,
उठो पूत क्या संकट आज।।
माँ कहने में संकोच आज,
पितु आदेश कठिन आज।।
हर संकट में माता रहे साथ,
कहो पूत क्या संकट आज।।
पूत के कष्ट निवारण हेतु,
प्राणोंत्सर्ग भी कम जानो।
क्या पूत तुम्हारे पथ संकट?
तुरत निवारण उसका जानो।।
मातु आज कठिन परीक्षा भारी,
पितु आदेश कठिन अरु भारी।
कहो पूत क्या आदेश पति का,
पूत हमारा प्राणों से अति भारी।।
प्राणेश्वर का हो आदेश यदि,
काट शीश ले जाओ अभी।
माता रक्षक सदा हि पूत की,
कहो पूत पितु आदेश अभी।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
शनिवार, 6 जून 2026
भार्गव राम खण्डकाव्य - 19
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर.
| अशर्फी लाल मिश्र (1943----) |
राम मातु पिता गुरु आज्ञाकारी,
सम्मुख थी कठिन परीक्षा भारी।
ब्रह्मर्षि जमदग्नि ने जब देखा,
चार पूत निकले अवज्ञाकारी।।
ब्रह्मर्षि जमदग्नि ने शाप देकर,
भस्म कर दिया निज पुत्रों को।
अब थी पंचम पूत राम की बारी,
पर राम रहे विनीत आज्ञाकारी।।
इसी बीच ब्रह्मर्षि जमदग्नि ने,
आदेश दिया था प्रिय राम को।
निज माता शीश काट अभी,
सम्मुख लेकर आओ अभी।।
आदेश पाय पितु जमदग्नि,
चरण रज ले आशीष राम।
धाय पहुँच गये माता पास,
चरण सिर धरि मांगे आशीष।
बार बार रेणुका उठा रही निज कर से,
थे मातु चरण धो रहे राम अश्रु धारा से।
मातु आज अति कठिन परीक्षा घड़ी,
मातु दीजे आशीष पाऊँ यश इस घड़ी।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
गुरुवार, 4 जून 2026
भार्गव राम खण्डकाव्य - 18
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र (1943----) |
जमदग्नि मन में आया विचार,
अब बच्चों की हुई पूरी शिक्षा।
क्या मेरे बच्चे हैँ आज्ञाकारी?
क्यों न उनकी ली जाये परीक्षा।।
ब्रह्म मुहूर्त में नित ही जाती,
जल आनय हेतु देवि रेणुका।
समय निकल गया पूजा का,
थी नाहीं लौटी देवि रेणुका।।
जब जमदग्नि ने ध्यान लगाया,
तब विलम्ब का कारण जाना।
जल केलि देखि गंधर्व चित्ररथ,
इक क्षण मोहित रेणुका जाना।।
अब जमदग्नि निज मन ठानी,
कौन पूत है पितु आज्ञाकरी।
एक एक कर सब पूत बुलाये,
कहा करिये वध निज महतारी।।
जमदग्नि बुलाये चार पूत क्रम से,
सभी दूर हो गये निज माता वध से।
आकर क्रोध में ब्रह्मर्षि जमदग्नि ने,
चारों पुत्र भस्म कर दिये ब्रह्मर्षि ने।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर.©
भार्गव राम खण्डकाव्य - 24
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943----) कार्तवीर्य था अति बलशाली, भगवन दत्तात्रेय के वरदान से। हो गईं थीं दो ...
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© लेखक : अशर्फी लाल मिश्र Asharfi Lal Mishra वियोगी होगा पहला कवि...