लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
| अशर्फी लाल मिश्र (1943-----) |
दिवस का अवसान जान,
हुआ निशि पति आगमन।
प्रफुल्लित थी अब निशा,
देख रजनीपति आगमन।।
निशा नील परिधान में,
रुपहले बूटे चमक रहे थे।
कदम रखा निशापति ने ,
निशा थी थिरकने लगी।।
सारी रात निशा थिरकी,
शशि केलि करता रहा।।
हथप्रभ सभी उड़गन थे,
छिटक नर्तन देख निशा।।
प्राची दिशि ऊषा आगमन,
उड़गन करने लगे पलायन।
देखा चेहरा लाल रवि का,
पीत हुआ चेहरा शशि का।।
जब आँखें तरेरी दिनकर ने,
भयभीत हुई अब रजनी थी।
झटपट नील परिधान समेटा,
भाग गयी अब रजनी थी।।
लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©