बुधवार, 6 मई 2026

भार्गव राम - 5

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर.

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)







सहमति जानि भ्राता की,

राम की दादी हुईं गदगद।

धाये राम मातु की कुटिया,

जहाँ पिता बैठे  जमदग्नि।।


अति हर्षित होकर राम कहहिं,

ऋषि विश्वामित्र हैँ दादी पास।

जब नाम सुना निज मामा का,

मिलने दौड़े हर्षित माता पास।।


दूर से देखि ऋषि मामा को ,

दौड़ि प्रणाम करहिं जमदग्नि,

आगे  बढ़  विश्वामित्र राजर्षि,

 गले लगाया ऋषि जमदग्नि।।


बहुत काल  में दर्शन दीन्हें ,

अब चलिये मेरी कुटिया में।

मन में  अति  हर्षित होकर,

राजर्षि जमदग्नि कुटिया में।।


कुटिया  जब  पधारे  राजर्षि,

रेणुका, राम चरण रज लीन्ह।

जोरि  पाणि  विनती  रेणुका,

अब राम तुम्हारी शरण कीन्ह।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

शनिवार, 2 मई 2026

भार्गव राम - 4

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)











राजा  गाधि की थी  पुत्री,
सत्यवती था उसका नाम।
माता  ऋषि जमदग्नि की,
दादी  रेणुका  नंदन  राम।। 

राम जायें जब दादा  पास,
आसन लगाकर बैठें पास।
दादा सुनाएँ दिव्य  वेद मंत्र,
अल्प काल सब सीखे मंत्र।।

एक  दिवस कुटिया आये,
जमदग्नि मामा विश्वामित्र।
ऋषि ऋचीक का संकेत पा,
दौड़ राम चरण रज  लीन्ही।।

विश्वामित्र ने जब जाना,
पंचम पूत जमदग्नि का।
राजर्षि हो गये थे गदगद,
अरु गले लगाया राम को।।

दादी ने कहा तभी  भ्रात से,
कुछ शस्त्र ज्ञान दीजे भ्राता।
सहर्ष विश्वामित्र ने कहा हाँ,
ले  जाऊँ आश्रम राम अभी।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

भार्गव राम - 3

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र (1943------)







रमणीक शिखर विंध्याचल का,

था खुला खजाना  प्रकृति का।

जानापाव  नाम   से  है  चर्चित,

जँह आश्रम स्थल जमदग्नि का।।


अद्य  वहाँ महू जिला इंदौर,

सोहे  आश्रम  जमदग्नि का।

प्रकृति  जहाँ खुली थिरकती,

 अरु उदगम स्थल चम्बल का।।


 हो ऊषा होंठों पर मुस्कान,

सदा  मयूर करते  हों नर्तन।

जँह साथ खेलें मृग वनराज,

अरु राम खेलें छौना वनराज।


प्रमुख सप्त  ऋषियों में,

वेदज्ञ  ऋषि थे जमदग्नि।

बालक राम की प्रतिभा से,

अभिभूत  ऋषि जमदग्नि।।


राम ने पाया वैदिक ज्ञान,

अपने पितु जमदग्नि से।

युद्ध-कला    शस्त्र-ज्ञान,

जमदग्नि चाहें  शिव  से।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर.©


शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

भार्गव राम -2

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







 घुटुवन चलत गिरत परत,

राम आवत कुटिया बाहर।

जब ध्यान गया  माई   का,

दौड़  पड़ी   कुटिया  बाहर।।


बाहर खेल रहे रेणुका नंदन,

साथ था छौना वनराज का।

एक क्षण थी मातु अचंभित,

सचमुच  छौना वनराज का?


वनराज खेल  में गुर्राया,

फेंका सौ योजन राम ने।

अति  हर्षित मातु रेणुका,

जब वनराज फेंका राम ने ।।


इसी बीच आ गये थे दादा,

ऋषि ऋचीक  कुटिया पर।

कल से राम खेलेगा नित्य,

मेरे साथ  मेरी कुटिया पर।।


राम नित्य  सुबह  जायें,

खेलें  दादा  कुटिया पर।

खेल खेल बहु शिक्षा पाई,

निज दादा की कुटिया पर।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

भार्गव राम-1

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







वैशाख मास का रम्य महीना,

था सतयुग त्रेता सन्धिकाल।

तिथि तृतीया शुक्ल पक्ष की,

रेणुका जन्मा अद्भुत लाल।।


जमदग्नि कुटिया हो गई जगमग,

जब कुटिया में प्रगटा पंचम लाल.

हर्षित  होकर  गदगद  ऋषि ने,

नाम  रख  दिया  उसका 'राम'।।


जब जाना ऋषियों मुनियों ने,

भीड़ जुटी  ऋषि आश्रम पर।

सब दर्शन  को थे  लालायित,

प्रथम  दर्शन हों शिशु राम के।।


देव  भी गये   वेश  बदलकर,

दर्शन हित जमदग्नि राम के।

मुख तेज देख सभी अचंभित,

जिसने भी दर्शन किये राम के।। 

 

बालक राम का तेज देखि,

जमदग्नि थे अब  चिंतित।

शस्त्र शास्त्र की शिक्षा कैसे,

गुरु  होंय स्वयं  शिव  जैसे।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

रविवार, 22 मार्च 2026

दहशत में मानवता

 लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

 अशर्फी लाल मिश्र (1943-------)


मानवता आज दहशत में,

चहुँ ओर मचा  हाहाकार।

दानवता अब दहाड़ रही,

हुँकार भर रही  बार बार।।


छाये हैँ परमाणु के बादल,

आज दहशत में मानवता।

किस क्षण टकरायें बादल,

अरु हो जाये घनघोर वर्षा।।


विश्व  के कोने  कोने में,

मानव जीवन दहशत में।

कब कैसी आये बौछार,

मानव जीवन दहशत में।।


दानवता है मुँह खोले,

चाह रही  निगलने को,

भूँखे  बच्चे  रहे कराह,

मातायेँ हैँ  सिसक रहीं।।


किस क्षण  होवे  बिस्फोट,

धधक रही परमाणु ज्वाला,

आ  जाओ  तुम घन श्याम,

झूम बरसो हो ठंढी ज्वाला।।

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

बुधवार, 11 मार्च 2026

पतलइयाँ गोरी गोरी

 रचनाकार एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







मधुमास  महीना जब  जब ,

चमकें पतलइयाँ गोरी गोरी।

मन हर किसी का मोह रहीं,

कोमल पतलइयाँ गोरी गोरी।।


लिये खजाना प्राणवायु का,

हैँ कोमल पीपल पतलइयाँ।

निजी कोष हैँ  सदा लुटातीं,

विना भेद कोमल पतलइयाँ।।


देखि देव  वृक्ष  की  शोभा,

हर  किसी   का  मन  मोहे।

सिद्धार्थ  गौतम  भी  न रहे,

मोहे विन कोमल पतलइयाँ।।


जान उदारता देव वृक्ष की,

समाधि लगा ली गौतम ने।

बहु काल ध्यान लगाये रहे,

जग सार  जाना गौतम  ने।।


ज्ञान  मिला जब  गौतम को,

जग में गौतम बुद्ध कहलाये।

सानिध्य पा बुद्ध गौतम का,

पीपल  बोधि  वृक्ष  कहलाये।।

Author: Asharfi Lal Mishra, Akbarpur, Kanpur.©

भार्गव राम - 5

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर. अशर्फी लाल मिश्र (1943-----) सहमति जानि भ्राता की, राम की दादी हुईं गदगद। धाये राम मातु की कुटिय...