लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) |
जब आयी वरात जनक नगरी,
विधिवत कीन्ह जनक अगवानी।
कुशध्वज राजा जनक भ्राता,
दशरथ कंधे बिठाये अगवानी।।
आगे आगे चल रहे गुरु वशिष्ठ,
अनुगामी थे उनके सब राजा।
हो रहा वरात नर्तन अति सुन्दर,
संगत ताल दे रहे विविध बाजा।।
रानी सुनयना स्वयं पहुँच गई,
जिस रथ पर दशरथ रानियाँ।
दासी साथ,साथ स्वागत माला,
कीन्हे अर्पित स्वागत माला।।
सभी रानियाँ राजा दशरथ,
आकर बैठे स्वयंबर सभा।
वैदिक रीति से सजी वेदियाँ,
पाणि ग्रहण अब बीच सभा।।
अब हो रही थी विदाई सीता की,
साथ उर्मिला, मांडवी श्रुतिकीर्ति।
अश्रुधारा बहे सुनयना चंद्रभागा,
जनक कुशध्वज भी न रोक सके।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।