लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र (1943---) |
भंजन पिनाक धनु किसने किया,
किसने किया शिव गुरु अपमान।
राजन आप की मिथिला नगरी में,
कैसे हो गया गुरु शिव अपमान।।
जामद्गन्य अब पूँछ रहे थे बार बार,
पर निकले मुख से इक शब्द नहीं।
तभी करबद्ध खड़े हो गये राघव राम,
भगवन अनुमति से बोले सेवक राम।।
भार्गव राम की अनुमति पाइ,
बता दिया संकल्प जनक का।
राजर्षि विश्वामित्र हैं मेरे गुरु,
देखन आये स्वयंबर सीता का।।
राजा पधारे थे देश देश से,
बैठे थे बीच स्वयंबर सभा।
तभी मिथिलापति द्वारा हुई,
घोषणा बीच स्वयंबर सभा।।
पिनाक रखा था बीच सभा,
सम्मुख खड़ी थी जनक लली।
दोनों कर में लिये जयमाला,
थी पलक झुकाये जनक लली।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।