बुधवार, 11 मार्च 2026

पतलइयाँ गोरी गोरी

 रचनाकार एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







मधुमास  महीना जब  जब ,

चमकें पतलइयाँ गोरी गोरी।

मन हर किसी का मोह रहीं,

कोमल पतलइयाँ गोरी गोरी।।


लिये खजाना प्राणवायु का,

हैँ कोमल पीपल पतलइयाँ।

निजी कोष हैँ  सदा लुटातीं,

विना भेद कोमल पतलइयाँ।।


देखि देव  वृक्ष  की  शोभा,

हर  किसी   का  मन  मोहे।

सिद्धार्थ  गौतम  भी  न रहे,

मोहे विन कोमल पतलइयाँ।।


जान उदारता देव वृक्ष की,

समाधि लगा ली गौतम ने।

बहु काल ध्यान लगाये रहे,

जग सार  जाना गौतम  ने।।


ज्ञान  मिला जब  गौतम को,

जग में गौतम बुद्ध कहलाये।

सानिध्य पा बुद्ध गौतम का,

पीपल  बोधि  वृक्ष  कहलाये।।

Author: Asharfi Lal Mishra, Akbarpur, Kanpur.©

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