रविवार, 22 मार्च 2026

दहशत में मानवता

 लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

 अशर्फी लाल मिश्र (1943-------)


मानवता आज दहशत में,

चहुँ ओर मचा  हाहाकार।

दानवता अब दहाड़ रही,

हुँकार भर रही  बार बार।।


छाये हैँ परमाणु के बादल,

आज दहशत में मानवता।

किस क्षण टकरायें बादल,

अरु हो जाये घनघोर वर्षा।।


विश्व  के कोने  कोने में,

मानव जीवन दहशत में।

कब कैसी आये बौछार,

मानव जीवन दहशत में।।


दानवता है मुँह खोले,

चाह रही  निगलने को,

भूँखे  बच्चे  रहे कराह,

मातायेँ हैँ  सिसक रहीं।।


किस क्षण  होवे  बिस्फोट,

धधक रही परमाणु ज्वाला,

आ  जाओ  तुम घन श्याम,

झूम बरसो हो ठंढी ज्वाला।।

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

बुधवार, 11 मार्च 2026

पतलइयाँ गोरी गोरी

 रचनाकार एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







मधुमास  महीना जब  जब ,

चमकें पतलइयाँ गोरी गोरी।

मन हर किसी का मोह रहीं,

कोमल पतलइयाँ गोरी गोरी।।


लिये खजाना प्राणवायु का,

हैँ कोमल पीपल पतलइयाँ।

निजी कोष हैँ  सदा लुटातीं,

विना भेद कोमल पतलइयाँ।।


देखि देव  वृक्ष  की  शोभा,

हर  किसी   का  मन  मोहे।

सिद्धार्थ  गौतम  भी  न रहे,

मोहे विन कोमल पतलइयाँ।।


जान उदारता देव वृक्ष की,

समाधि लगा ली गौतम ने।

बहु काल ध्यान लगाये रहे,

जग सार  जाना गौतम  ने।।


ज्ञान  मिला जब  गौतम को,

जग में गौतम बुद्ध कहलाये।

सानिध्य पा बुद्ध गौतम का,

पीपल  बोधि  वृक्ष  कहलाये।।

Author: Asharfi Lal Mishra, Akbarpur, Kanpur.©

शनिवार, 7 मार्च 2026

सौंदर्य रजनी का

 लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)


दिवस का अवसान जान,

हुआ निशि पति  आगमन।

प्रफुल्लित थी अब निशा,

देख रजनीपति  आगमन।।


निशा  नील परिधान में,

रुपहले बूटे चमक रहे थे।

 कदम रखा निशापति ने ,

निशा थी  थिरकने लगी।।


सारी रात निशा थिरकी,

शशि केलि करता रहा।।

हथप्रभ सभी उड़गन थे,

छिटक नर्तन देख निशा।।


प्राची दिशि ऊषा आगमन, 

उड़गन करने लगे पलायन।

 देखा चेहरा लाल रवि का,

पीत हुआ चेहरा शशि का।।


जब आँखें तरेरी दिनकर ने,

भयभीत हुई अब रजनी थी।

झटपट नील परिधान समेटा,

भाग  गयी  अब  रजनी थी।।

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

भार्गव राम

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।© अशर्फी लाल मिश्र (1943----) वैशाख मास का रम्य महीना, था सतयुग त्रेता सन्धिकाल। तिथि तृतीया शुक्ल...