लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र ( 1943----) |
चिता हुई जब प्रज्वलित,
वेदज्ञ ऋषि जमदग्नि की।
करबद्ध बैठी देवि रेणुका,
माँग रही अन्तिम विदाई।।
धूँ धूँ कर जल उठी चिता,
देवलोक से होये पुष्प वर्षा।
ऋषि मुनि चहुँ ओर खड़े थे,
कह धन्य देवि करें पुष्प वर्षा।।
त्रिदेव भी थे आ गये,
अर्पित करें पुष्पांजलि।
थे चकित दृश्य देखकर,
सती रेणुका दृश्य देखि।।
रेणुका जब भस्म हो गईं,
जमदग्नि ऋषि के साथ।
तभी आ गये काले मेघ,
झूम बरसे हुई ठंढी आग।।
राम ने मस्तक भस्म लगाई,
मन में लिया संकल्प तभी।
शीघ्र मिटाऊँ सहस्त्रार्जुन वंश,
मन को मिलेगी शान्ति तभी।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©