लेखक : अशर्फी लाल मिश्र अकबरपुर कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र (1943----) |
शीश उगा कण्व ऋषि बांस,
दो धनु निर्मित विश्वकर्मा।
एक धनु का नाम सारंग था,
दूजे धनु का नाम पिनाक।।
चतुरानन दे सारंग विष्णु,
अरु पिनाक दिया महादेव।
वर्चस्व हेतु अब द्वन्द युद्ध,
हुआ विष्णु अरु महादेव।।
दोनों में कोई कम नहीं,
विष्णु अरु महादेव में।
ब्रह्माण्ड में हाहाकार,
रोका ब्रह्मा द्वन्द युद्ध।।
फेंका शिव पिनाक धरा,
उठा लिया राजा देवरात।
थे देवरात जनक पूर्वज,
पिनाक अब जनक पास।।
विष्णु ने अब सारंग धनु,
सौंप दिया ऋषि ऋचीक।
शक्ति संतुलन थी दोनों में,
विष्णु पालक शिव संहारक।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
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