मंगलवार, 27 अगस्त 2024

विप्र सुदामा - 50

 रचनाकार एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।


अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)



कान्हा लेटे थे  निज शैय्या पर,

पर आँखों  मेँ उनके नींद नहीं।

संदीपनि आश्रम उज्जयिनी में,

कभी मीत का छोड़ा साथ नहीं।।


मीत  हमारा  था  अति मेधावी,

अति प्रिय था संदीपनि गुरु का।

आज हम हैँ दोनों अलग अलग,

पर दोनों  का नाता  आश्रम का।।


काल चक्र का घूमा पहिया,

हम हैँ आज द्वारिका राजा।

मेधावी था जो  मीत हमारा,

भिक्षाटन  कर  रहा गुजारा।।


 गूँज रही  है कानों में ध्वनि,

मनु मीत सुदामा रहा पुकार।

करुण क्रन्दन जब जब सुनूँ,

ह्रदय  पर  होये  प्रबल प्रहार।।


रात  दिवस  हर  समय  ही,

मीत  पुकार  सुनते  कान्हा।

राजकाज   नहि   लागे  मन,

भूख प्यास भी नाही कान्हा।।

रचनाकार एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


शनिवार, 10 अगस्त 2024

विप्र सुदामा - 49

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
अशर्फी लाल मिश्र (1943------)











विप्र थे तत्व  ज्ञानी ब्राह्मण,
उपकृत महल स्वीकार नहीं।
निज टूटी खाट  के सम्मुख,
इंद्र सिंहासन  स्वीकार नहीं।।

जब से  जाना  मीत बेहाल,
गायब रौनक कान्हा तन से।
छप्पन भोग अब सीठे लगें,
थी नींद  उड़  गई आँखों से।।

जब  भी  थाली भोजन आये,
कान्हा कहते अभी भूख नहीं।
सत्यभामा खड़ी थीं कर जोड़े,
नाथ कई दिनों से खाया नहीं।।

छप्पन  भोग  थाली  देख,
मीत की  याद  आने  लगे।
मीत  हमारे   बिन भोजन,
सोचकर अश्रु  बहने   लगे।।

बहु भांति कीन्ह विनती भामा,
पर ग्रास एक भी छुआ नहीं।
जल पीकर आ गये शैया पर,
पर आँखों में उनके नींद नहीं।।

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

रविवार, 4 अगस्त 2024

दोहे वर्षा आगमन पर

 लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)







वर्षा आगत जान के, झींगुर झिल्ली गान।

भेक  भी   हैँ  छेंड रहे, मीठी अपनी तान।।1।।

बनन बागन मयूर अब, नर्तन करते  झूमि।

मयूर  पंख  बिखर  रहे, मनु रत्न पड़े भूमि।।2।।

पानी बिन बेजान थे,उनमें  आई   जान।

ज्योंही बदरा झूम में, बरसे भूमिय आन।।3।।

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

भार्गव राम खण्डकाव्य - 28

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943---) बध  किया कार्तवीर्य अर्जुन  का, सेना  ने  किया  मुझ  पर  प्रहार। तभी  ...