शनिवार, 10 अगस्त 2024

विप्र सुदामा - 49

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
अशर्फी लाल मिश्र (1943------)











विप्र थे तत्व  ज्ञानी ब्राह्मण,
उपकृत महल स्वीकार नहीं।
निज टूटी खाट  के सम्मुख,
इंद्र सिंहासन  स्वीकार नहीं।।

जब से  जाना  मीत बेहाल,
गायब रौनक कान्हा तन से।
छप्पन भोग अब सीठे लगें,
थी नींद  उड़  गई आँखों से।।

जब  भी  थाली भोजन आये,
कान्हा कहते अभी भूख नहीं।
सत्यभामा खड़ी थीं कर जोड़े,
नाथ कई दिनों से खाया नहीं।।

छप्पन  भोग  थाली  देख,
मीत की  याद  आने  लगे।
मीत  हमारे   बिन भोजन,
सोचकर अश्रु  बहने   लगे।।

बहु भांति कीन्ह विनती भामा,
पर ग्रास एक भी छुआ नहीं।
जल पीकर आ गये शैया पर,
पर आँखों में उनके नींद नहीं।।

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

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