सोमवार, 6 जुलाई 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 34

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943---)







राजा ऋषियों का अपमान करे,

यह राजा को  देता शोभा  नहीं।

क्षत्रिय राजा  करे विप्र अपमान,

यह  राजा  को देता  शोभा नहीं।।


पिता  तुम्हारे  गये  पितु आश्रम,

साथ में उनके थी  विशाल सेना.

भव्य स्वागत  किया  पितु मेरे ने,

चकित थे तुम्हारे पिता मय सेना।।


माता पिता  का अपमान देखि,

अरु  राजा ने लूटी थी कामधेनु।

तभी दण्डित किया यहाँ आकर,

वापस  साथ  ले  गया  कामधेनु।।


पिता ब्रह्मर्षि थे तप में लीन,

अर्जुन पूतों ने कर दिया बध।

क्यों न  अर्जुन  वंश  मिटाऊँ ,

कर  दूँ आज  सभी  का  बध।।


था सहस्त्रार्जुन  पूत  जयध्वज,

अब राजा महिष्मति  नगरी का।

पकड़ बाँध लो अब जमद्गनि पूत,

हुआ आदेश  जयध्वज राजा का।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


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