लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
| अशर्फी लाल मिश्र (1943----) |
जान आगमन ऋतुपति का,
प्रफुल्लित हो गई धरा आज।
पीत वसन में था ऋतुपति,
थी हरित चूनर में धरा आज।।
देख निशान किंशुक रथ ऊपर,
मन ही मन मुदित धरा आज।
मनु रतिपति की थी दृष्टि पड़ी,
अब सिहर उठी थी धरा आज।।
भ्रमर बजा रहे थे सारंगी,
गिलहरी का मोहक नर्तन।
थी कूल्हे वह मटकाय रही,
ऊँचे स्वर में वह गाय रही।।
मयूर भी थे आ धमके,
जान ऋतुपति आगमन।
कर रहे छिटक नर्तन,
जान ऋतुपति आगमन।।
लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
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