द्वारा : अशर्फी लाल मिश्र
 |
अशर्फी लाल मिश्र राजनीति अपराधी गले माला ,राजनीति के संग। पुलिस जिसकी तलाश में ,अब वही रक्षक संग।। काला धन होय सफ़ेद ,राजनीति के संग। साथी सब नेता कहें ,शत्रु रह जायें दंग।। साक्षर होय केवल वह , अशिष्ट भाषा होय। काला धन हो पास में, मंत्री बनता सोय।।
©कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर, कानपुर।
|
जी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(१८-०९-२०२१) को
'ईश्वर के प्रांगण में '(चर्चा अंक-४१९१) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
बहुत बहुत आभार।
हटाएंसुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
हटाएंवाह...।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
हटाएंसुंदर सटीक व्यंग्य रचनाएं।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
हटाएंबहुत सुन्दर व्यंग
जवाब देंहटाएंवाह!!!
बहुत बहुत आभार।
जवाब देंहटाएंबहुत ही बढ़िया कहा ।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
हटाएंबहुत सटीक...
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
हटाएं