द्वारा : अशर्फी लाल मिश्र
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दहशत में मानवता
लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।© अशर्फी लाल मिश्र (1943-------) मानवता आज दहशत में, चहुँ ओर मचा हाहाकार। दानवता अब...
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© लेखक : अशर्फी लाल मिश्र Asharfi Lal Mishra वियोगी होगा पहला कवि...
जी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(१८-०९-२०२१) को
'ईश्वर के प्रांगण में '(चर्चा अंक-४१९१) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
बहुत बहुत आभार।
हटाएंसुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
हटाएंवाह...।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
हटाएंसुंदर सटीक व्यंग्य रचनाएं।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
हटाएंबहुत सुन्दर व्यंग
जवाब देंहटाएंवाह!!!
बहुत बहुत आभार।
जवाब देंहटाएंबहुत ही बढ़िया कहा ।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
हटाएंबहुत सटीक...
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार।
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