-- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र |
राजनीति
मुफ्त रेवड़ी बांटिये, भोली जनता साथ।
अर्थ व्यवस्था हो शिथिल,केवल सत्ता हाथ।।
-- लेखक एवं रचनाकार अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
-- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र |
दशमी का चाँद ऐसा,
मनु नवल बधू का मुखड़ा।
कुछ काल ठहरो,
मत कहो किसी से दुखड़ा।।
संयम राखो मन में,
उठ जायेगा परदा धीरे धीरे।
सम्मुख होगी शरद पूनो,
होगी चाल धीरे धीरे।।
मुस्कान होगी ऐसी।
जनु अमृत बरसे धीरे धीरे।।
-- लेखक एवं रचनाकर: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
-- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र |
सूखा पेड़ आम का कहता,
मुझ में कभी जवानी थी।
तन पर हरी चादर लिपटी,
मोहक अदा हमारी थी।।
पास खड़े थे कई साथी,
भव्य दिखती अमराई थी।
उन्नत उरोज रसाल देख,
सब के मन में लालसा थी।।
'लाल' की लालसा एक रही,
पक्व रसाल हो हाथों में,
मुँह लगा कर जी भर खाऊं।
भाग्य सराहूँ जीवन में ।।
-- लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943---) मुनि सतानंद की अनुमति पाय, धीरे धीरे चल पड़ी जनक लली। अनुगामी हो गईं थ...