रविवार, 28 अगस्त 2022

नीति के दोहे मुक्तक

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 






भ्रम

स्वर्ण मृग था कहीं नहीं, भ्रम  में  भटके राम।

जो भी नर भ्रम में पड़ा, बिगड़ा उसका काम।।


-- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत सुंदर। सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर
    गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  3. जो भी नर भ्रम में पड़ा, बिगड़ा उसका काम।।

    सटीक एकदम...

    जवाब देंहटाएं

भार्गव राम खण्डकाव्य - 6

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943-------) आशीष मातु प्रात काल, अरु पितु  अनुमति पाइ। दादी चरण रज सिर धरि, अ...