शनिवार, 1 मार्च 2025

स्वर्णिम दिन

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)








मत  निराश  करो  मन  को, 

जब दुरदिन बादल छाये हों।

अश्रु रोक  निज पथ खोजो,

तब  स्वर्णिम  दिन  आयेगा।।



जब दुरदिन मेघ गरजते हों,

तड़ित  मध्य  चमकती  हो।

उस  प्रकाश  में पथ खोजो,

तब स्वर्णिम  दिन  आयेगा।।


अरि  गर्जन कर्कश ध्वनि,

कर्ण कुहर  में  चुभती हो।

चुनो तुम शीतल शांत पथ,

तब स्वर्णिम  दिन आयेगा।।


त्रिविध ताप से होगी मुक्ति,

जब दुरदिन मेघ उड़ जायेंगे।

शांत हो जायेगा अरि गर्जन,

तब  स्वर्णिम  दिन  आयेगा।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

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