गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025

विप्र सुदामा - 65

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







इधर कन्हैया पास सुदामा,

युग बीता जैसे  क्षण सम।

उधर द्वारिका में भामा का,

क्षण बीत  रहा  युग  सम।।


भामा सहित सभी रानियाँ,

थीं चिंतित पुरी द्वारिका में।

कन्हैया भूले  राज द्वारिका,

मगन अब मीत सुदामा में।।


भामा ने भेजे दूत चहुँ ओर,

कहाँ टिके हैँ द्वारिकानाथ।

दूत पहुँच गये पुरी सुदामा,

रमे थे कान्ह सुदामा साथ।।


कुटिया  द्वार  खड़ा  था  दूत,

दंडवत  कर  रहा   बार  बार।

नाथ बिनु द्वारिका शोभा ऐसी,

कलशहीन मन्दिर शोभा जैसी।।


नाथ बिना  अब सभी रानियाँ,

भोजन पानी  सब  कुछ त्यागे।

नगरवासियों  की ही बात नहीं,

अब तो गायों ने भी  तृण त्यागे।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर कानपुर।©

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