Prithviraj लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Prithviraj लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 24 सितंबर 2020

बाल सखा बहुतै मिलिहैं

 © कवि: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर  

अशर्फी लाल मिश्र 
बाल     सखा    बहुतै    मिलिहैं,
पर चन्द  की  समता कोई नहीं।
चन्द    पृथ्वीराज का बाल सखा,
जीवन पर्यन्त  छोड़ा  साथ   नहीं।।

पृथ्वीराज  बंदी था गजनी में ,
साथ    में   चंदबरदाई   भी। 
गजनी में चंद  की एक पहल ,
महाराज  हमारे  तीर कुशल। 

शब्द   पर   उनका  तीर   चले ,
चाहें  सुल्तान  परीक्षा  कर लें। 
पृथ्वीराज ने साधा तीर कमान ,
ऊपर से देख रहा गोरी सुल्तान।। 

तभी चंद ने छंद सुनाया ,
पृथ्वीराज ने तीर चलाया। 
अब  भूमि   पड़ा था गोरी,
धन्य  राज   चंद  की  जोरी।।
=*=

शनिवार, 19 सितंबर 2020

मुर्दे भी सुनकर फड़क उठें

 © कवि ; अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर 

अशर्फी लाल मिश्र 

कवि चंद की कविता ऐसी थी। 
मुर्दे  भी  सुनकर  फड़क उठें।।

चंद  पृथ्वीराज   का  सेनापति,
दरबार  में  था   दरबारी  कवि। 
कविता  पढ़े  जब  युद्ध भूमि में ,
सैनिकों की भुजायें  फड़क उठें।।

पृथ्वीराज    गोरी   का   बंदी ,
पट्टी    बंधी    थी  आँखों  पर। 
कवि  चंद  का  दोहा  सुनकर ,
तीर  चलाया  था  गोरी  पर।।

कवि चंद की कविता ऐसी थी। 
मुर्दे   भी  सुनकर  फड़क  उठें।।
=*= 

       

भार्गव राम खण्डकाव्य - 61

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) अनीर्णित युद्ध छोड़ देवव्रत से, भार्गव वापस आये महेंद्र गिरि। अपनी  स...