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बुधवार, 2 फ़रवरी 2022

उठो पंख फैलाओ

 -अशर्फी लाल मिश्र

अशर्फी लाल मिश्र






उठो पंख फैलाओ ,

छू लो नभ के तारे।

चमको ऐसे जग में,

बन के चांद सितारे।।


भू पर होये भोजन,

शयन चांद पर होये।

ओज  होय  मन  में,

मुट्ठी  में  जग   होये।।


करिये जग में ऐसा काम,

हो होंठो  पर  तेरा  नाम।

मातृ भूमि का सिर ऊंचा,

करिये जग में ऐसा काम।।


--अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर, कानपुर।




भार्गव राम खण्डकाव्य - 61

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) अनीर्णित युद्ध छोड़ देवव्रत से, भार्गव वापस आये महेंद्र गिरि। अपनी  स...