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रविवार, 3 जुलाई 2022

नीति के दोहे मुक्तक

 --अशर्फी लाल मिश्र

अशर्फी लाल मिश्र






स्वास्थ्य

झाग  हटा  हल्दी डाल, तब ही दाल उबाल।

गठिया पथरी होय कम, दुपहर  खाए  दाल।।1।।

सुख

मोह सरिस कोइ शत्रु नहि, काम सरिस नहि रोग।

क्रोध  सरिस  पावक  नहीं,ज्ञान सरिस सुख भोग।।2।।

सामर्थ्य

नेता क्या नहि कर सके, कवि को क्या न लखाय।

क्या न शराबी बक सके, कागा  क्या  नहि  खाय।।3।।

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश।©


शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

नीति के दोहे (मुक्तक)

 कवि : अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर। 

अशर्फी लाल मिश्र 
खुशबू 
फूल  खुशबू  साथ पवन , पवन बहे जिस ओर। 
प्रतिभा  खुशबू  खुद बहे, फैले     चारों   ओर।। 
सुख 
भविष्य चिन्ता छोड़ दे ,भूतहि  देय विसार। 
वर्तमान   संभाल    ले ,सुखी  होय  संसार।।
=*=
© Poet : Asharfi Lal Mishra,Akbarpur, Kanpur.


बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

नीति के दोहे (मुक्तक)

© कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर 

अशर्फी लाल मिश्र 












मित्र 
परिछाईं   संकट   काल, धीरज   देता  होय। 

स्वार्थ रहित हो भावना ,मीत जानिये सोय।।

सुख

वशीभूत   न लालच के  ,निन्दा  से हो दूर। 
ताहि जीवन सदा सुखी ,खुशियों से भरपूर।।

भार्गव राम खण्डकाव्य - 61

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) अनीर्णित युद्ध छोड़ देवव्रत से, भार्गव वापस आये महेंद्र गिरि। अपनी  स...