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गुरुवार, 18 नवंबर 2021

केश सज्जा

द्वारा : अशर्फी  लाल मिश्र 


बिखरे बाल बरबादी , बंधे बाल खुशाल। 

कटे बाल सम भाव के ,ऐसा केशन हाल।।


कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर। 

शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

नीति के दोहे मुक्तक

 कवि : अशर्फी लाल मिश्र 

अशर्फी लाल मिश्र 

केश 
श्वेत   केश  तजुर्बे   के, काले  केश उमंग। 
काजल रेख नयन संग , मन में भरता रंग।।

 पाषाण हृदय

पाहन  हिय मृदुता  संग ,सरल ह्रदय बन  जाय। 
जिमि शैल खंड जल धार, रुचिर शिवांग कहाय।।

कवि : अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर।  




भार्गव राम खण्डकाव्य - 61

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) अनीर्णित युद्ध छोड़ देवव्रत से, भार्गव वापस आये महेंद्र गिरि। अपनी  स...