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रविवार, 3 जुलाई 2022

नीति के दोहे मुक्तक

 --अशर्फी लाल मिश्र

अशर्फी लाल मिश्र






स्वास्थ्य

झाग  हटा  हल्दी डाल, तब ही दाल उबाल।

गठिया पथरी होय कम, दुपहर  खाए  दाल।।1।।

सुख

मोह सरिस कोइ शत्रु नहि, काम सरिस नहि रोग।

क्रोध  सरिस  पावक  नहीं,ज्ञान सरिस सुख भोग।।2।।

सामर्थ्य

नेता क्या नहि कर सके, कवि को क्या न लखाय।

क्या न शराबी बक सके, कागा  क्या  नहि  खाय।।3।।

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश।©


भार्गव राम खण्डकाव्य - 61

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) अनीर्णित युद्ध छोड़ देवव्रत से, भार्गव वापस आये महेंद्र गिरि। अपनी  स...