लोकतंत्र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
लोकतंत्र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 27 दिसंबर 2021

दोहे राजनीति पर

 द्वारा : अशर्फी लाल मिश्र 

अशर्फी लाल मिश्र 





       

                        दोहे 

1 - उत्सव होइ चुनाव का , बजैं जाति के ढोल। 

      खाई जनता में बढ़े , सुन सुन कड़ुवे  बोल।। 

2 - जातिवाद अभिशाप है , लोकतंत्र के देश। 

     समाज सेवा होइ नहि ,जातिय झंडा शेष।।


कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर। 



भार्गव राम खण्डकाव्य - 61

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) अनीर्णित युद्ध छोड़ देवव्रत से, भार्गव वापस आये महेंद्र गिरि। अपनी  स...