शनिवार, 8 मार्च 2025

विप्र सुदामा - 66

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943------)







बहु काल रहे जब कन्हैया,

पुरी सुदामा मीत के पास।

भूल गये थे कान्ह द्वारिका,

जब से आये सुदामा पास।।


देख सम्मुख द्वारिका दूत,

दंडवत कर रहा बार बार।

कहौ दूत तुम कैसे आये?

किसने मेरा पता बताया।।


नाथ रानियाँ सब व्याकुल,

व्याकुल सारी  द्वारिका है।

पक्षी भी कलरव बन्द किये,

बिनु नाथ  द्वारिका  सूनी है।।


सभी  रानियाँ भोजन त्यागे,

अंखियन नीर  सदा ही बहे।

दिन रात कभी भी नींद नहीं,

कोई मुख से बोले शब्द नहीं।।


नाथ बिना अब द्वारिका में,

छा गई  उदासी चारों ओर।

अब तो नाथ चलो द्वारिका,

हम आप  को  लेने आये हैँ।।

लेखक: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

2 टिप्‍पणियां:

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