गुरुवार, 13 मार्च 2025

विप्र सुदामा - 67

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

    अशर्फी लाल मिश्र ( 1943----)

दूत मुख सून हाल पुरी का,

मन में बिचलित कान्ह हुये।

बैठे थे जो कान्ह अभी तक,

अब युग कर जोरे खड़े हुये।।


विप्र ने कहा मीत कान्हा से,

मिलकर जाओ सुशीला से।

कान्हा  चले महल की ओर,

अनुमति  हेतु  सुशीला  से।।


ठिठकते कदम  कन्हैया  के,

बढ़ रहे  थे  महल  की ओर।

मुख्य द्वार पर लगा था चित्र,

भानु  लली संग  माखनचोर।।


कुछ  काल चित्र में खो गये,

फिर  दस्तक दी  कन्हैया ने।

दौड़कर पहुँची सुशीला द्वार,

सिर झुका  दिया  कन्हैया ने।।


मान  सहित सुशीला साथ,

तब महल गये द्वारिकानाथ।

देवि सुशीला अनुमति  चाहूँ,

हम जाना  चाहे दूत के साथ।।

लेखक: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

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