शुक्रवार, 10 मार्च 2023

होली की मस्ती

 -- अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र








फागुन में खिले टेसू के फूल,

फूलों  में  सुंदर टेसू  के फूल।

फागुन की हवा अकड़ते अंग ,

सबको चढ़ता  होली  का रंग।।


दादी  थिरक  रहीं अंगना में,

दादा    मारे   रंग पिचकारी।

बिटवा    ढोल   बजाय   रहे,

बहुएं    थिरकें    दे      तारी।।


पोता-पोती    रंग    उड़ाएं,

उछलें      दे       दे   तारी।

घर-घर बाजैं  ढोल मंजीरा,

घर-घर      उत्सव    भारी।।

-- लेखक एवं रचनाकार, अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।






शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2023

दोहे ऊषा सौन्दर्य पर

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


अशर्फी लाल मिश्र






गालों पर लाली दिखे, बिंदी उसके भाल।

नित्य बुलाये विहस कर, आओ मेरे लाल।।1।।

देय  समय  पालन  शिक्षा, कभी  न  होती   लेट।

बिनु वाणी बिनु कलम के, बिना अक्षर बिनु स्लेट।।2।।

चिर सुहागिन प्रकृति से, सदा हि बिंदी भाल।

बिना जाति बिनु धर्म के, मनु  ऊषा  वाचाल।।3।।

-- लेखक एवं रचनाकार :अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर,

 कानपुर । ©

सोमवार, 23 जनवरी 2023

नीति के दोहे मुक्तक

 -- अशर्फी लाल मिश्र 

अशर्फी लाल मिश्र








भेदभाव 

पुत्री  सबको  मन  भावै, बहु को सेवक जान।

जिहि घर बहुयें प्रिय लगें, ता घर स्वर्ग समान।।1।।

दृढ़ता

मन में दृढ़ता होय यदि, शिखरहु पद तल मान।

मन में दृढ़ता होय नहि, असफल जीवन जान।।2।।

जल 

औषधि है जल अपच में, पचने  पर बल देय।

भोजन  में   पीयूष   सम,भोजनान्त विष पेय ।।3।।

-- लेखक एवं रचनाकार:अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर ।©


शनिवार, 31 दिसंबर 2022

गुन गुनी धूप

 -- अशर्फी लाल मिश्र


अशर्फी लाल मिश्र 







बैठ लो कुछ क्षण

गुन गुनी धूप में,

आ रहा कुहरे का शासन

फिर मिली न मिली

- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर ।


बुधवार, 14 दिसंबर 2022

नीति के दोहे मुक्तक

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943------)







पिता जिसका रत्नाकर, बहन  लक्ष्मी  होय।

ऐसा शंख होय भिक्षुक, भीख न देता कोय।।1।।

सौ  सुत  से  उत्तम   एक , जो  होवे  वागीश।

जिमि इक चंदा तिमिर हर, कहलाये रजनीश।।2।।

प्रसंगानुसार      भाषण,शक्ति अनुसार क्रोध।

प्रकृति के अनुकूल प्रिय, बुद्धिमान कह शोध।।3 ।।

-- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर ।


मंगलवार, 6 दिसंबर 2022

नीति के दोहे मुक्तक

 --अशर्फी लाल मिश्र

अशर्फी लाल मिश्र 


निन्दित कर्म करता जो, अरु पाछे पछताय।

ऐसी  बुद्धि   कर्म   पूर्व, दौलत  घर में आय ।।1।।

जाको प्रिय मीठा वचन, ताही सों प्रिय बोल।

 मृगहि हनन को व्याध भी, गावै मधुर अमोल।।2।।

अग्नि  गुरु  राजा  नारी, मध्यावस्था       सेय।

निकट होये विनाश भय, दूरहि फल नहि देय।।3।।

ऊँचे  आसन   से   नहीं, गुण से उत्तम जान।

मन्दिर शिखर पर कागा, नाहीं गरुड़ समान।।4।।

-- लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

शुक्रवार, 4 नवंबर 2022

नीति के दोहे मुक्तक

- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 






जीवन मंत्र 

जीवन के मंत्र मानो, प्रेम सत्य अरु ज्ञान।

होय विश्वास कर्म में,फल  देगा  भगवान।।

- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र।

भार्गव राम खण्डकाव्य - 61

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) अनीर्णित युद्ध छोड़ देवव्रत से, भार्गव वापस आये महेंद्र गिरि। अपनी  स...