शुक्रवार, 10 मार्च 2023

होली की मस्ती

 -- अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र








फागुन में खिले टेसू के फूल,

फूलों  में  सुंदर टेसू  के फूल।

फागुन की हवा अकड़ते अंग ,

सबको चढ़ता  होली  का रंग।।


दादी  थिरक  रहीं अंगना में,

दादा    मारे   रंग पिचकारी।

बिटवा    ढोल   बजाय   रहे,

बहुएं    थिरकें    दे      तारी।।


पोता-पोती    रंग    उड़ाएं,

उछलें      दे       दे   तारी।

घर-घर बाजैं  ढोल मंजीरा,

घर-घर      उत्सव    भारी।।

-- लेखक एवं रचनाकार, अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।






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