शुक्रवार, 4 नवंबर 2022

नीति के दोहे मुक्तक

- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 






जीवन मंत्र 

जीवन के मंत्र मानो, प्रेम सत्य अरु ज्ञान।

होय विश्वास कर्म में,फल  देगा  भगवान।।

- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र।

बुधवार, 5 अक्टूबर 2022

नीति के दोहे मुक्तक

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 






राजनीति 

मुफ्त   रेवड़ी      बांटिये,  भोली जनता साथ। 

अर्थ व्यवस्था हो शिथिल,केवल  सत्ता   हाथ।।

-- लेखक एवं रचनाकार अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

दशमी का चाँद

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 






दशमी   का   चाँद  ऐसा,

मनु नवल बधू का मुखड़ा।

कुछ        काल      ठहरो,

मत कहो किसी से दुखड़ा।।

संयम    राखो   मन     में,

उठ जायेगा परदा धीरे धीरे।

सम्मुख   होगी   शरद  पूनो,

होगी   चाल   धीरे      धीरे।।

मुस्कान      होगी      ऐसी।

जनु अमृत बरसे  धीरे  धीरे।।

-- लेखक एवं रचनाकर: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

शुक्रवार, 9 सितंबर 2022

नीति के दोहे मुक्तक

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर ।

अशर्फी लाल मिश्र 






अल्प ज्ञानी

अल्प ज्ञानी अभिमानी, मन  से  क्रोधी  होय।

वेश   होय   आडम्बरी, क्रोधहि, आपा खोय।।1।।

राजनीति

स्वर बदला वेश बदला, जब दल बदला जाय।

साथ  में  धब्बा   काला,दल  बदलू  कहलाय।।2।।

-- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

रविवार, 28 अगस्त 2022

नीति के दोहे मुक्तक

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 






भ्रम

स्वर्ण मृग था कहीं नहीं, भ्रम  में  भटके राम।

जो भी नर भ्रम में पड़ा, बिगड़ा उसका काम।।


-- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

रविवार, 21 अगस्त 2022

नीति के दोहे

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 






विनय 

मैं हूँ अधम खल कामी, करुवे    मेरे    बोल।

नाथ कर दो  मम वाणी, मीठी अरु अनमोल ।।

-- लेखक एवं रचनाकार - अशर्फी लाल मिश्र अकबरपुर, कानपुर।©

गुरुवार, 18 अगस्त 2022

नीति के दोहे मुक्तक

-- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 






प्रेम 

प्रेम हिये की अनुभूति, नहि चाहे प्रतिदान।

होय चाह प्रतिदान की, उसे वासना जान ।।1।।

स्नेह

नेह   निकटता   से   बढ़े, दूरी  से  हो   दूर।

पशु पक्षी भी होंय निकट, मिले नेह भरपूर।।2।।


-- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

भार्गव राम खण्डकाव्य - 6

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943-------) आशीष मातु प्रात काल, अरु पितु  अनुमति पाइ। दादी चरण रज सिर धरि, अ...