बुधवार, 10 मई 2023

नीति के दोहे मुक्तक

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र 






जोड़ी

सदा सावधान रहिये, जोड़ी    रखिये   भाय।

वायस से सीखो इसे, 'लाल' कहत समझाय।।1।।

टहलना 

ऊषा कालहि घूमिये, श्वानहि की हो चाल।

देह   में  आये  फुर्ती, घूमे    ऊषा    काल।।2।।

शिक्षा 

अल्पहि भोजन से तुष्टि, कबहुँ न मांगे भीख।

स्वामि भक्ति अरु शूरता, श्वानहि से ही सीख।।3।।

-- लेखक एवं रचनाकार अशर्फी लाल मिश्र अकबरपुर कानपुर।©

शुक्रवार, 5 मई 2023

नीति के दोहे मुक्तक

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र 






भय

भय से डरिए ही सदा, जब तक आया नाहि।

सम्मुख आया होय भय, मार भगाओ ताहि।।1।।

वाणी

चतुर उसे ही जानिये, जो प्रिय वादी होय।

स्पष्ट वक्ता होय यदी, धोखा नाहीं कोय।।2।।

शून्य 

संतान बिन घर सूना, जनु मूरख बिन ज्ञान।

गरीबी होय  पास  में, मनु सूना  जग जान।।3।।

-- लेखक  एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

मंगलवार, 2 मई 2023

नीति के दोहे मुक्तक

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 







स्वर्ग 

पुत्र   होय  आज्ञाकारी, तिय हो मन अनुसार।

अल्प विभव से तुष्टि हो, यही  स्वर्ग  का सार।।1।।

राजनीति

गुंडे    दबंग    बढ़   रहे, राजनीति के साथ।

क्रिमिनल भी हैं जुड़ रहे, लिये  पोटली हाथ।।2।।

--लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

मंगलवार, 4 अप्रैल 2023

क्रूर डायर का फायर

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र 







 बैशाखी    का    त्यौहार   था,

भीड़ जुटी जलियाँवाले बाग में।

जनरल   डायर  का  था  कर्फ्यू,

नहिं   होगा  उत्सव पंजाब  में।।


दस  फीट   ऊँची   बाढ़  लगी थी,

जलियाँवाले          बाग         में।

एक   तरफ    था  जश्न  बाग   में, 

दूजे   बरस   रही   थीं    गोलियाँ।।


ऊँचे  पर  थी डायर  की सेना,

जँह से बरस रही थीं गोलियाँ।

लाशों पर लाशें बिछी  हुई  थी,

अब   जलियाँवाले    बाग   में।।


रुधिर प्रवाह से बना  सरोवर,

लाशें  तैर  रही  थीं   बाग  में।

क्रूर डायर का फायर बंद नही,

जब तक अंतिम गोली पास में।।


अब  था  सारा  भारत दुखी, 

इस   नर  संहारी  घटना  से।

नाइट  हुड   पदवी   लौटाई, 

बंगाली     कवि   टैगोर    ने।।

-- लेखक एवं रचनाकार:अशर्फी लाल मिश्र,अकबरपुर, कानपुर।©


मंगलवार, 28 मार्च 2023

जब जन्मे अवध बिहारी

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र 






चैत   महीना  शुक्ल   पक्ष,

जब  जन्मे  अवध बिहारी।

मध्यान्ह समय तिथि नवमी,

जब  जन्मे  अवध  बिहारी।।

दिनपति  गति थम सी गई,

जब  जन्मे  अवध  बिहारी।

महल कौशल्या थाली बाजे 

जब   जन्मे  अवध  बिहारी।।

युवती जन  सब थिरक रहे,

जब  जन्मे   अवध  बिहारी।

जब  खबर   मिली   राजहि,

कौशल्या जन्मा इक लाला।।

दासी  दियो है  मुतियन माला,

 दासी  कह्यौ अद्भुत है  लाला।

राजा ने खोला अपना खजाना,

सब  को  बाँटे मुतियन  माला।।

-- लेखक एवं रचनाकार:अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


बुधवार, 15 मार्च 2023

सिकुड़ रहे हैं रिश्ते आज

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र 







सिकुड़  रहे  हैं  रिश्ते  आज,

छोटे कुटुम्ब की लहर आज।

राखी  में रहती सूनी  कलाई,

नाहीं   बहना   अपनी  आज।।

होली  आई  उल्लास भरी,

बिनु भौजी घर सूना आज।

कौन  लगाये   रंग  महावर,

घर  में  नाहीं  भौजी  आज।।

भैया  दूज  का  पर्व  अनूठा,

नाहीं   बहना   अपनी  आज।

कौन   लगाये   भाल  तिलक,

नाहीं   बहना  अपनी   आज।।

बहना  लिये   है  राखी  हाथ,

नाहीं   भैया   अपना   आज।

भैया   दूज  को   थाल  सजा,

भैया   नाहीं   अपना    आज।।

-- लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

मंगलवार, 14 मार्च 2023

पीछे पीछे वृषभानु लली

 -- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर,कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र 







खेलत  खेलत  एक दिवस,

कान्हा पहुँचे वृषभानु गली।

देख  दुवारे  वृषभानु   खड़े,

कान्हा  पूंछे  वृषभानु  लली।।


कान्हा   द्वार   पुकार   रहे,

बाहर   आओ   मेरी  लली।

बाहर आई  वृषभानु  लली,

खेलन  चलिहौ  मेरी  गली।।


ताही समय अधराधार वंशी,

गूँज    गई   वृषभानु।  गली।

आगे आगे कान्हा  चलि  रहे,

पीछे   पीछे   वृषभानु   लली।। 

--©लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र,अकबरपुर, कानपुर।

भार्गव राम खण्डकाव्य - 61

  लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---) अनीर्णित युद्ध छोड़ देवव्रत से, भार्गव वापस आये महेंद्र गिरि। अपनी  स...