सोमवार, 22 जून 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 27

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र ( 1943--=)







कार्तवीर्य अर्जुन  का बध कर,

वापस   दिव्य  कामधेनु  राम।

अभी   धेनु  थी  अति  उदास,

अब हर्षित हुइ आई साथ राम।।


कामधेनु आश्रम जब लौटी,

देखि  जमदग्नि  दहाड़ रोई।

दौडि  जमदग्नि मिले थे धेनु,

रेणुका  जा  गले  मिलि  रोई।।


अब रेणुका छोड़ कामधेनु,

वह गले लिपट गईं राम से।

पूत महा  बलशाली अर्जुन,

तुम धेनु छुड़ाकर लाये कैसे?


ऋषि  जमदग्नि अब पूँछ रहे,

दिव्य धेनु वापस आयी कैसे?

था मातु  पिता  दिव्य आशीष,

अरु शिव  की कृपा  महान से।।


अन्यायी राजा का सिर पकड़ा,

परशु से  काटी  भुजायें हजार।

अरु शीश काट सहस्त्रार्जुन का,

फेंक  दी   मुंडी  योजन  हजार।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

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भार्गव राम खण्डकाव्य - 27

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