गुरुवार, 28 मई 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 17

लेखक अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।








जानी   शिक्षा जब पूर्ण हुई,

राम अनुमति मांगे शिव से।

साष्टांग प्रणाम करैं शिव को,

बार बार बिनती  करें गुरु से।।


जाओ  मिलये  मातु शैलजा,

अनुमति मांगो घर जाने की।

राम पहुँच गये  पास शैलजा,

शीश रख दिया माँ चरणों में।।


मातु अब हम घर जाना चाहें,

अनुमति दीजे घर जाने  की।

बहुत  समय  कैलाश शिखर,

अब जननी राह देखती होगी।।


किस मुख से,अरु कैसे कहूँ,

राम  तुम   जाओ   घर  को।

अश्रु  पूरित  हो गई  शैलजा,

हाथ रख  दिया  सिर राम के।।


शैलजा के अश्रु बहते देख,

प्रेमाश्रु राम के टपकने लगे।

कुछ दूर  तक शिव शैलजा,

राम  धीरे  धीरे  चलने  लगे।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


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भार्गव राम खण्डकाव्य - 17

लेखक अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। जानी   शिक्षा जब पूर्ण हुई, राम अनुमति मांगे शिव से। साष्टांग प्रणाम करैं शिव को, बार बार बिनती  करे...