लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
| अशर्फी लाल मिश्र (1943----) |
गुप्त गुफा कैलाश शिखर,
राम सीख रहे दिव्यज्ञान,
अग्नि वायु के थे दिव्यास्त्र,
संचालन ब्रह्मास्त्र ज्ञान।।
महा शक्तिशाली विनाशकारी,
पशुपतास्त्र का भी दिया ज्ञान।
मार्शल आर्ट अरु युद्ध कला,
पाया राम व्यावहारिक ज्ञान।।
युद्ध कला में हो गये निपुण,
यह जान हर्षित शिव मन में।
कुछ गुप्त मंत्र दिये राम को,
त्रिलोक विजय कवच साथ में।।
सदा हि राम पथ धर्मधुरी का
थे मातु पिता गुरु आज्ञाकारी।
शिव ने सव विधि जान लिया,
अति आल्हादित थे त्रिपुरारी।।
अमोघ अस्त्र विद्युदभि भी,
दे दिया प्रिय शिष्य राम को.
परशु का आकार है उसका,
मन भाया जमदग्नि राम को।।
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
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