सोमवार, 15 जून 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 23

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







आये त्रिदेव अनुसुइया परीक्षा,

मातु बना दिये  त्रिदेवहिं शिशु।

सभी शिशु थे भूख से व्याकुल,

मातु करावहि  स्तनपान  शिशु।


बड़ा  हुआ  जब  बालक ,

दत्तात्रेय  अत्रि  बुलावहि,

मातु  जिनकी अनुसुइया,

दत्ता दत्ता  पूत  बुलावहि ।।


थे  तीन शीश  अरु एक शरीर,

भगवन दत्तात्रेय नाम विख्यात।

छह भुजायें थीं शोभित जिनके,

पूत अत्रि  अनुसुइया  विख्यात।।


कार्तवीर्य अर्जुन  था राजा,

पुरा  महिष्मति  नगरी  का।

था दत्तात्रेय का अनन्य भक्त,

क्षत्रिय  था  हैहय  वंश  का।।


देख  कठिन  तपस्या कार्तवीर्य,

हो गये  थे दत्तात्रेय अति प्रसन्न।

मांगो आज तुम मनोवांछित वर,

सुन कार्तवीर्य हुआ अति प्रसन्न।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।


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