मंगलवार, 8 सितंबर 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 58

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







था  रचा  स्वयंबर  काशी  में,

काशी  नरेश  की पुत्रियों का।

अपहरण कर लाये थे देवव्रत,

अंबा अंबिका अंबालिका का।।


अंबा ने हस्तिनापुर में बताया,

हमरे दिल में बैठे शाल्व नरेश।

जब जानी देवव्रत अंबा व्यथा,

ले गये अंबा पास शाल्व नरेश।।


अपहरित बाला मुझे स्वीकार नहीं,

अब थी निराश काशी नरेश बाला।

अंबा का था अब अनुरोध देवव्रत से,

नीति कहती आप मुझे स्वीकार करें।।


माँग रही न्याय भीख अंबा,

सारे जगत में भटकी  अंबा।

हर जगह ठुकराई  गईं अंबा,

आश्रम भार्गव अंत में अंबा।।


जब व्यथा सुनी अंबा की,

भेजा देवव्रत तुरत सन्देश।

अपनाओ अपहरित बाला,

या फिर करिये मुझसे युद्ध।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर शनिवार 12 सितंबर 2026 को लिंक की गयी थी, तकनीकी कारणों से आमंत्रण आपके ब्लॉग पर प्रकाशित नहीं हो सका है....रचना प्रकाशित है, असुविधा के लिये खेद है

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!


    !

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भार्गव राम खण्डकाव्य - 62

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