सोमवार, 29 जून 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 31

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)






चंदन काष्ठ चिता बनी थी,

हुआ था गंगाजल  स्नान।

ले पार्थिव शरीर निज गोद,

बैठि रेणुका प्रभु का ध्यान।।


खबर फैल गईं त्रिभुवन में,

हत्या निर्मम ऋषि जमदग्नि।

सभी सप्तर्षि मन में आहत,

दौड़े आश्रम ऋषि जमदग्नि।।


भीड़ जुट गईं ऋषियों मुनियों की,

देने अन्तिम विदाई ऋषि जमदग्नि।

हर किसी  के टपकें अँखियन नीर,

देखि  रेणुका चिता ऋषि जमदग्नि।।


जब  खबर  फैली त्रिभुवन में,

देवि  रेणुका  सती   पति संग।

ऋषि पत्नियाँ भी आ गईं दौड़,

शची आ पहुँचीं निज पति संग।।


राम ने दी जब चिता मुखाग्नि,

रेणुका भस्म  हुई पति के संग।

सभी ऋषि मुनि अरु सभी देव,

धन्य धन्य रेणुका गईं पति संग।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

भार्गव राम खण्डकाव्य - 31

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943----) चंदन काष्ठ चिता बनी थी, हुआ था गंगाजल  स्नान। ले पार्थिव शरीर निज गोद...