गुरुवार, 25 जून 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 29

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)






पिता सहस्त्रार्जुन का बध,

देखि विशाल  सेना संहार।

नीति अनीति  विचार बिनु,

पुत्रों में था प्रतिशोध अपार।।


महिष्मति  जब जासूसों ने,

नहीं राम जमदग्नि आश्रम।

सहस्त्रार्जुन मिलि सभी पूत,

आक्रमण जमदग्नि  आश्रम।।


पूरा आश्रम कर दिया ध्वस्त,

अरु जमदग्नि का सिर काट,

कर दी नृशंस राम पितु हत्या,

बन्द कर दिये रेणुका  कपाट।।


जादुई थी आश्रम में कामधेनु,

कुछ  सैनिक बढ़े उसकी ओर,

चाहा उसे ले चलने अपने साथ,

पर चली गई इन्द्रलोक की ओर।।


अर्जुन पूत  जब  सेना  सहित,

वापस  हो गये  महिष्पुर नगरी।

तब राम की जननी देवि रेणुका,

सती हो  गईं निज पति के साथ।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

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