सोमवार, 8 जून 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 21

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र ( 1943---)







सब विधि माता को अनुकूल जान,

कह दिया कठिन आदेश पिता का।

शीश काट पूत तुम ले जाओ अभी,

अर्पित कर दो सहर्ष पितु चरणों में।।


 थी  पितु आज्ञा  सिरोधार्य,

धरि मातु चरण निज शीश।

मन में  शिव  को नमन कर,

काट दिया  प्रिय मातु शीश।।


एक हाथ में लिये परशु,

दूजे मातु रेणुका शीश।

राम पहुँचे पितु के पास,

पितु चरणों में मातु शीश।।


गदगद  हो गये ब्रह्मर्षि अब ,

जान राम  पितु आज्ञाकारी।

पर राम का चेहरा था उदास,

थीं जग  खुशियाँ माता पास।।


जमदग्नि थे अति  हर्षित,

 पुत्रों में  राम  आज्ञाकारी।

राम माँगो मनोवांछित वर,

एक नहीं तुम तीन तीन वर।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

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