गुरुवार, 4 जून 2026

भार्गव राम खण्डकाव्य - 18

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)







जमदग्नि मन में आया विचार,

अब बच्चों की हुई पूरी शिक्षा।

क्या मेरे  बच्चे  हैँ  आज्ञाकारी?

क्यों न उनकी ली जाये परीक्षा।।


ब्रह्म मुहूर्त में नित ही जाती,

जल आनय हेतु देवि रेणुका।

समय निकल गया पूजा का,

थी नाहीं लौटी  देवि रेणुका।।


जब जमदग्नि ने ध्यान लगया,

तब विलम्ब का कारण जाना।

जल केलि देखि गंधर्व चित्ररथ,

इक क्षण मोहित रेणुका जाना।।


अब जमदग्नि निज मन ठानी,

कौन पूत है  पितु  आज्ञाकरी।

एक एक कर सब  पूत बुलाये,

कहा करिये वध निज महतारी।।


जमदग्नि  बुलाये चार पूत क्रम से,

सभी दूर हो गये निज माता वध से।

आकर क्रोध में ब्रह्मर्षि जमदग्नि ने,

चारों पुत्र भस्म  कर  दिये ब्रह्मर्षि ने।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर.©

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

भार्गव राम खण्डकाव्य - 18

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943----) जमदग्नि मन में आया विचार, अब बच्चों की हुई पूरी शिक्षा। क्या मेरे  बच्...