बुधवार, 13 नवंबर 2024

बिनु पानी बेहाल

लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)











कच्चे घर  थे मृदा के, गहरे  रहते   ताल।
पोखर पूरित वारि से, भू जल ऊँचे साल।।1।।

गाँव  में  घर  हैँ  पक्के, ताल बन गये खेत।
स्मारक कूप आज दिखें,अरु  नल  देवें रेत।।2।।

पोखर ताल सिमट रहे, सभी बन  गये  खेत।
भू जल  नीचे  हो  रहा, नल जल मिश्रित रेत।।3।।

कागज में सभी गहरे, पानी पूरित ताल।
भू जल नीचा हो रहा, बिनु पानी बेहाल।।4।।

जल को जीवन जानिये, जलहि रखो संजोय।
जल के सदा अभाव में, मुश्किल जीवन होय।।5।।


रचनाकार एवं लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

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