-- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
अशर्फी लाल मिश्र |
भ्रम
स्वर्ण मृग था कहीं नहीं, भ्रम में भटके राम।
जो भी नर भ्रम में पड़ा, बिगड़ा उसका काम।।
-- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
-- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
अशर्फी लाल मिश्र |
सूखा पेड़ आम का कहता,
मुझ में कभी जवानी थी।
तन पर हरी चादर लिपटी,
मोहक अदा हमारी थी।।
पास खड़े थे कई साथी,
भव्य दिखती अमराई थी।
उन्नत उरोज रसाल देख,
सब के मन में लालसा थी।।
'लाल' की लालसा एक रही,
पक्व रसाल हो हाथों में,
मुँह लगा कर जी भर खाऊं।
भाग्य सराहूँ जीवन में ।।
-- लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©
- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर, देहात।
अशर्फी लाल मिश्र |
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तिरंगा |
हर हाथ तिरंगा,
हर घर में तिरंगा।
भारत की है शान तिरंगा,
भारत की पहिचान तिरंगा।।
प्रतीक शक्ति का आज तिरंगा,
विकास का मानक बना तिरंगा।
रूस - यूक्रेन के युद्ध समय,
प्राणों का रक्षक बना तिरंगा।।
आजादी के शूर शहीदों का,
सम्मान देता आज तिरंगा।
चांद होय या मंगलयान,
लहराये शान से आज तिरंगा।।
भुखमरी होय या महामारी,
प्राणो का रक्षक बना तिरंगा।
अमृत महोत्सव भारत में।
सम्मान का पर्याय बना तिरंगा ।।
लेखक एवं रचनाकार - अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर देहात।
-- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।
अशर्फी लाल मिश्र |
बढ़ रहा पथिक निर्जन पथ पर,
उसका कोई गंतव्य नहीं ।
उमड़ घुमड़ उठ रहे विचार,
पर उनका कोई अंत नहीं।।
कभी कदम तेजी से बढ़ते,
पर थमने का लेते नाम नहीं।
अब पथ गुजर रहा बीहड़ से,
सिंह हटने का लेता नाम नहीं।।
देखा साहस पथिक का ज्योंही,
हट गया पथ से मनु बनराज नहीं।
बढ़ रहा पथिक निर्जन पथ पर,
उसका कोई गंतव्य नहीं।।
- लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर , कानपुर।©
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र (1943----) बगिया में इक फूल गुलाब, देख माली कर रहा आदाब। भौरे करते उसका यशगा...