बुधवार, 28 जुलाई 2021

माई हम नाहीं जैहैं पनियाँ भरन

 द्वारा : अशर्फी लाल मिश्र  

अशर्फी लाल मिश्र







माई  हम  तो गई  थी पनियाँ भरन। 

मारग  में  मिल  गये  मुरली  धरन। 

 एक पैर से खड़े, बांकी थी चितवन। 

कटि थी  तिरीछी कटि  में करधन। 

माई शोभित मुरली उनके अधरन। 

हम  भूल गई  माई  पनियाँ भरन। 

माई छूट गये घट गिर गए धरनि। 

माई हम नाहीं जैहैं पनियाँ  भरन।।

© कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर। 


7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर रचना। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय ।।।।

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  2. दीदी विभा रानी बहुत बहुत आभार।

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  3. वाह! सुंदर मधुर आंचलिक माधुर्य लिए सरस सृजन।

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