कवि : अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर।
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अशर्फी लाल मिश्र
कमजोरी मत करो प्रदर्शन ताहि , जो कमजोरी होय। नहि छोड़े फुसकार अहि , भले विषहीन होय।।
मित्र भले ही हो अच्छा मित्र ,कम करियो विश्वास। मित्र होये यदि नाराज ,खोल भेद उपहास।।
मत करो समर्थन ताहि,गलत करे जो काम। दूरी राखि सदा रहो, नाही उधार दाम।।
राजनीति क्रिमिनल चुनाव मैदान ,खूब होइ मतदान। क्रिमिनल पहुँचेँ सदन में ,सबसे ज्यादा मान ।।
© अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर।
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सीखप्रद सृजन..अति सुन्दर।
जवाब देंहटाएंबहिन मीना आप का बहुत बहुत आभार।
हटाएंयथार्थ वर्णित करती अच
जवाब देंहटाएंछी रचना ...
बहिन शरद जी आप का हृदय से आभार।
हटाएंबहिन अनीता आप का बहुत बहुत आभार।
जवाब देंहटाएंसार्थक मुक्तक - - दीपावली की असंख्य शुभकामनाएं - - नमन सह।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत हृदय से आभार
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