शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

रानी झाँसी शाश्वत है

 © अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

Asharfi Lal Mishra







इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में। 

रानी     झाँसी    शश्वत    है।। 


पीठ   पर     दामोदर      था,

मुंह से पकड़ी  बाग जिसने।

दोनों हाथों से तलवार चलाई,

वह   लक्ष्मीबाई   शाश्वत है।। 


युद्ध  भूमि  में  थी  रणचण्डी ,

गोरों    निमित्त   जादूगरनी। 

अंग्रेजी सेना में मचाई भगदड़,

वह  रानी  झाँसी   शाश्वत  है।। 


मातृ   भूमि    की    रक्षा   में,

दी     प्राणों      की      बाजी।

इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में,

रानी     झाँसी     शश्वत    है।। 

           =*=


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

माई हम नाहीं जैहैं पनियाँ भरन-(भजन)

 द्वारा : अशर्फी लाल मिश्र   माई  हम  तो गई  थी पनियाँ भरन।  मारग  में  मिल  गये  मुरली  धरन।   एक पैर से खड़े, बांकी थी चितवन।  कटि थी  तिरी...