गुरुवार, 16 जुलाई 2020

हर कोइ दिखता है खामोश (मुक्तक)

© अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर
           (1)
वही है  चेहरा  वही परिवेश,
वही   कुटुम्ब   वही  पड़ोस।
हर  गतिविधि सीमित आज,
हर कोइ दिखता है खामोश।।
            (2)
जिसने कभी न पीड़ा जानी,
का  जानै  पर  पीर   पराई।
जाके घर  बेटी  नहिं जनमी,
का   जानै    बिदा   बिदाई।।

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