गुरुवार, 23 जनवरी 2025

विप्र सुदामा - 61

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)






कुछ पुरी सुदामा वासी,

दौड़े विप्र सुदामा पास।

कोई पथिक है आ रहा,

मिलने  विप्र  के  पास।।


ब्रह्मज्ञानी  समझ गये,

केवल   कान्हा   मीत,

दौड़ पड़े थे कुटिया से,

जा  मिले थे गले मीत।।


प्रेमाश्रु भू पर  टपक रहे,

मनु सूरसरि धारा निकली।

बहु काल भेंटे  दोनों मीत,

विप्र कुटी तब ले गये मीत।।


विप्र ने  अपनी  खाट पर,

आसन दिया था मीत को।

कान्हा मन में अति मुदित,

सिंहासन  तुच्छ  मीत  को।।


स्वागत हित सुदामा ने,

अर्पित जल कलश में।

ज्योंही  लिया  हाथ में,

अमिय भरा  कलश में।।

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

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