बुधवार, 27 अप्रैल 2022

है लगा अभी वैशाख

 --अशर्फी लाल मिश्र

अशर्फी लाल मिश्र 







है   लगा    अभी   वैशाख,

दिनकर उगल  रहा है आग।

पशु  पक्षी  सब  ढूढ़े  छाया,

सभी   लगाये  भागम  भाग।।


पश्चिम   मारुत  ऐसे   बहता,

मानो   मारुत   मारै     चाटा।

कोई  गश  खाकर भूमि पड़ा,

कोई    छोड़े   जीवन    नाता।।


-- लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी  लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर.

7 टिप्‍पणियां:

भार्गव राम खण्डकाव्य - 28

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