शुक्रवार, 6 मार्च 2020

वह मुझे इशारों से बुलाती है शाम ढलने पर


वह    मुझे    इशारों    से   बुलाती   है    शाम   ढलने   पर।
रुपहले सितारों की साड़ी में वह लिपटती है शाम ढलने पर।।

हमारे भोलेपन को देखकर  मुस्कराती  है शाम  ढलने पर।
निशब्द देख निशा छिटककर नृत्य करती शाम ढलने पर।।

[© अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर ]

नील परिधान बीच श्वेत सितारे मन भाये शाम ढलने पर।
वह   मुझे    इशारों   में    बुलाती    है    शाम   ढलने   पर।।

निशा  मिलती   निशापति   से  अकेले  में शाम ढलने पर।
वह   मुझे   इशारों   से    बुलाती   है     शाम   ढलने    पर।।


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