बुधवार, 18 दिसंबर 2019

ठंढी करवा दीं चिमनियाँ कारखानों की ( मुक्तक )

Asharfi Lal Mishra











कभी  कानपुर  गौरव  था  भारत का,
कहा जाता था मैनचेस्टर  भारत का। 

मजदूरों  पर  निगाह  पड़ी एक  नेता की,
ठंढी करवा दीं  चिमनियाँ कारखानों की।

मजदूर   हैं   वोट     बैंक,
मिलता   है    आश्वासन।

होगा मिलों का  पुनुरुद्धार,
पर   हालात  नहीं  बदले।

© कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर,कानपुर।  

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