मंगलवार, 20 जनवरी 2026

आगमन ऋतुपति का

 लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

अशर्फी लाल मिश्र (1943----)






जान आगमन ऋतुपति का,

प्रफुल्लित हो गई धरा आज।

पीत  वसन  में था  ऋतुपति,

थी हरित चूनर में धरा  आज।।


देख निशान किंशुक  रथ ऊपर,

मन ही मन  मुदित   धरा आज।

मनु रतिपति  की थी  दृष्टि  पड़ी,

अब सिहर उठी  थी  धरा आज।।


भ्रमर बजा  रहे  थे सारंगी,

गिलहरी का मोहक नर्तन।

थी कूल्हे वह मटकाय रही,

ऊँचे स्वर में  वह गाय रही।।


मयूर भी थे आ धमके,

जान ऋतुपति आगमन।

कर  रहे   छिटक  नर्तन,

जान ऋतुपति आगमन।।

लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

बुधवार, 7 जनवरी 2026

वातायन से

 लेखक एवं रचनाकार : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र ( 1943------)







प्रात  काल  नित ही ऊषा,

सदा झाँकती वातायन से।

कभी नहीं  चेहरा मुरझाया,

सदा विहँसते उसको पाया।।


इसी बीच  दुष्ट  कुहासा,

आ धमका वातायन पर।

मन में  उसके  थी  ईर्ष्या,

पर्दा  डाला  वातायन पर


बचपन का  मेरा याराना,

उसके संग हम  खेले  थे।

सदा विहँसती सुबह सुबह,

कहती छू लो सुबह सुबह।।


उसको देख हम दौड़ रहे,

वह थी पीछे हटती जाती।

इसी बीच भानु आ धमका,

भयभीत ऊषा छिप जाती।।

लेखक एवं रचनाकार: अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©


झलक उपवन की

 लेखक एवं रचनाकार - अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। (अशर्फी लाल मिश्र 1943-----) दिनकर ने  आँखें खोली, तब कलियाँ थीं अलसाई। पात पात पर बि...