शनिवार, 24 मई 2025

नीति के दोहे मुक्तक

 लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

अशर्फी लाल मिश्र (1943-----)







साँच  बोले  जग शंका, झूँठहि  जग  पतियाय।

समय देख बात करिये, 'लाल' कहत समझाय।।


लेखक : अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।©

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